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  • mukeshdak 00:14 on May 16, 2015 Permalink | Reply  

    Olympus PMI Webinar

     
  • mukeshdak 23:55 on May 15, 2015 Permalink | Reply  

    Olympus XRF Analyzer

     
  • mukeshdak 12:25 on May 5, 2015 Permalink | Reply  

    Life is very complicated 

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  • mukeshdak 10:03 on May 5, 2015 Permalink | Reply  

    Bread and Butter 

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  • mukeshdak 16:42 on May 3, 2015 Permalink | Reply  

    Site Performance 

    To optimize website, first have review of site performance at

    http://gtmetrix.com

     
  • mukeshdak 16:41 on May 3, 2015 Permalink | Reply  

    Page Speed 

    Check page speed of your website and also get tips for improvement at

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  • mukeshdak 16:38 on May 3, 2015 Permalink | Reply  

    Softwares I Like Most 

    Following are the software which I like most

    Free Wave to MP3 Convertor

    Best Free software for recording sound in Windows

     
  • mukeshdak 16:34 on May 3, 2015 Permalink | Reply  

    online image editors 

    So far, I have tried my luck with http://pixlr.com/ and found this to be excellent. I especially like its layer editing of image

     
  • mukeshdak 00:19 on May 3, 2015 Permalink | Reply  

    Deal with your problems 

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  • mukeshdak 14:00 on May 2, 2015 Permalink | Reply  

    सत्संग का महत्त्व 

    तुम्हें ऐसे व्यक्तियों का प्रेमपात्र बनने का सदैव प्रयत्न करते रहना चाहिए जो कष्ट पड़ने पर तुम्हारी सहायता कर सकते हैं और बुराइयों से बचाने की एवं निराशा में आशा का संचार करने की क्षमता रखते हैं।
    खुशामदी और चापलूसों से घिर जाना आसान है। मतलबी दोस्त तो पल भर में इकट्ठे हो सकते हैं, पर ऐसे व्यक्तियों का मिलना कठिन है, जो कड़वी समालोचना कर सके, जो खरी सलाह दे सकें, फटकार सकें और खतरों से सावधान कर सकें। राजा और साहूकारों की मित्रता मूल्यवान् समझी जाती है, पर सबसे उत्तम मित्रता उन धार्मिक पुरुषों की है, जिनकी आत्मा महान् है। जिसके पास पूँजी नहीं है, वह कैसा व्यापारी? जिसके पास सच्चे मित्र नहीं हैं, वह कैसा बुद्धिमान? उन्नति के साधनों में इस बात का बड़ा मूल्य है कि मनुष्य को श्रेष्ठ मित्रों का सहयोग प्राप्त हो। बहुत से शत्रु उत्पन्न कर लेना मूर्खता है, पर उससे भी बढ़कर मूर्खता यह है कि भले व्यक्तियों की मित्रता को छोड़ दिया जाए।
    निर्मल बुद्धि और श्रम में श्रद्धा, यही दो वस्तुएँ तो किसी मनुष्य को महान् बनाने वाली हैं। उत्तम गुणों को अपनाने से नीचे व्यक्ति ऊँचे बन सकते हैं और दुर्गुणों के द्वारा बड़े व्यक्ति छोटे हो सकते हैं। निरंतर लगन, सावधानी, समय का सदुपयोग छोटे को बड़ा बना सकते हैं, हीन मनुष्यों को कुलीन बना सकते हैं।

     
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